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ऋग्वेद 8.5.15
अ॒स्मे आ व॑हतं र॒यिं श॒तव॑न्तं सह॒स्रिण॑म् ।पु॒रु॒क्षुं वि॒श्वधा॑यसम्॥
asme ā vahataṃ rayiṃ śatavantaṃ sahasriṇam |purukṣuṃ viśvadhāyasam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंअ॒स्मे आ व॑हतं र॒यिं श॒तव॑न्तं सह॒स्रिण॑म् ।पु॒रु॒क्षुं वि॒श्वधा॑यसम्॥
asme ā vahataṃ rayiṃ śatavantaṃ sahasriṇam |purukṣuṃ viśvadhāyasam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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