ऋग्वेद 8.50.7
यद्ध॑ नू॒नं प॑रा॒वति॒ यद्वा॑ पृथि॒व्यां दि॒वि ।यु॒जा॒न इ॑न्द्र॒ हरि॑भिर्महेमत ऋ॒ष्व ऋ॒ष्वेभि॒रा ग॑हि॥
yaddha nūnaṃ parāvati yadvā pṛthivyāṃ divi |yujāna indra haribhirmahemata ṛṣva ṛṣvebhirā gahi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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