ऋग्वेद 8.61.11
न पा॒पासो॑ मनामहे॒ नारा॑यासो॒ न जळ्ह॑वः ।यदिन्न्विन्द्रं॒ वृष॑णं॒ सचा॑ सु॒ते सखा॑यं कृ॒णवा॑महै॥
na pāpāso manāmahe nārāyāso na jaḷhavaḥ |yadinnvindraṃ vṛṣaṇaṃ sacā sute sakhāyaṃ kṛṇavāmahai ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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