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ऋग्वेद 8.63.12
अ॒स्मे रु॒द्रा मे॒हना॒ पर्व॑तासो वृत्र॒हत्ये॒ भर॑हूतौ स॒जोषा॑: ।यः शंस॑ते स्तुव॒ते धायि॑ प॒ज्र इन्द्र॑ज्येष्ठा अ॒स्माँ अ॑वन्तु दे॒वाः॥
asme rudrā mehanā parvatāso vṛtrahatye bharahūtau sajoṣā: |yaḥ śaṃsate stuvate dhāyi pajra indrajyeṣṭhā asmām̐ avantu devāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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