ऋग्वेद 8.67.6
सचा॒ सोमे॑षु पुरुहूत वज्रिवो॒ मदा॑य द्युक्ष सोमपाः ।त्वमिद्धि ब्र॑ह्म॒कृते॒ काम्यं॒ वसु॒ देष्ठ॑: सुन्व॒ते भुव॑:॥
sacā someṣu puruhūta vajrivo madāya dyukṣa somapāḥ |tvamiddhi brahmakṛte kāmyaṃ vasu deṣṭha: sunvate bhuva: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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