Loading
ऋग्वेद 8.68.15
ऋ॒ज्रावि॑न्द्रो॒त आ द॑दे॒ हरी॒ ऋक्ष॑स्य सू॒नवि॑ ।आ॒श्व॒मे॒धस्य॒ रोहि॑ता॥
ṛjrāvindrota ā dade harī ṛkṣasya sūnavi |āśvamedhasya rohitā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंऋ॒ज्रावि॑न्द्रो॒त आ द॑दे॒ हरी॒ ऋक्ष॑स्य सू॒नवि॑ ।आ॒श्व॒मे॒धस्य॒ रोहि॑ता॥
ṛjrāvindrota ā dade harī ṛkṣasya sūnavi |āśvamedhasya rohitā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें