ऋग्वेद 8.69.15
अ॒र्भ॒को न कु॑मार॒कोऽधि॑ तिष्ठ॒न्नवं॒ रथ॑म् ।स प॑क्षन्महि॒षं मृ॒गं पि॒त्रे मा॒त्रे वि॑भु॒क्रतु॑म्॥
arbhako na kumārako'dhi tiṣṭhannavaṃ ratham |sa pakṣanmahiṣaṃ mṛgaṃ pitre mātre vibhukratum ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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