ऋग्वेद 8.71.14
अ॒ग्निमी॑ळि॒ष्वाव॑से॒ गाथा॑भिः शी॒रशो॑चिषम् ।अ॒ग्निं रा॒ये पु॑रुमीळ्ह श्रु॒तं नरो॒ऽग्निं सु॑दी॒तये॑ छ॒र्दिः॥
agnimīḷiṣvāvase gāthābhiḥ śīraśociṣam |agniṃ rāye purumīḷha śrutaṃ naro'gniṃ sudītaye chardiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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