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ऋग्वेद 8.72.15
उप॒ स्रक्वे॑षु॒ बप्स॑तः कृण्व॒ते ध॒रुणं॑ दि॒वि ।इन्द्रे॑ अ॒ग्ना नम॒: स्व॑:॥
upa srakveṣu bapsataḥ kṛṇvate dharuṇaṃ divi |indre agnā nama: sva: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंउप॒ स्रक्वे॑षु॒ बप्स॑तः कृण्व॒ते ध॒रुणं॑ दि॒वि ।इन्द्रे॑ अ॒ग्ना नम॒: स्व॑:॥
upa srakveṣu bapsataḥ kṛṇvate dharuṇaṃ divi |indre agnā nama: sva: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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