ऋग्वेद 8.74.15
स॒त्यमित्त्वा॑ महेनदि॒ परु॒ष्ण्यव॑ देदिशम् ।नेमा॑पो अश्व॒दात॑र॒: शवि॑ष्ठादस्ति॒ मर्त्य॑:॥
satyamittvā mahenadi paruṣṇyava dediśam |nemāpo aśvadātara: śaviṣṭhādasti martya: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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