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ऋग्वेद 8.79.7
सु॒शेवो॑ नो मृळ॒याकु॒रदृ॑प्तक्रतुरवा॒तः ।भवा॑ नः सोम॒ शं हृ॒दे॥
suśevo no mṛḷayākuradṛptakraturavātaḥ |bhavā naḥ soma śaṃ hṛde ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंसु॒शेवो॑ नो मृळ॒याकु॒रदृ॑प्तक्रतुरवा॒तः ।भवा॑ नः सोम॒ शं हृ॒दे॥
suśevo no mṛḷayākuradṛptakraturavātaḥ |bhavā naḥ soma śaṃ hṛde ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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