ऋग्वेद 8.8.10
आ यद्वां॒ योष॑णा॒ रथ॒मति॑ष्ठद्वाजिनीवसू ।विश्वा॑न्यश्विना यु॒वं प्र धी॒तान्य॑गच्छतम्॥
ā yadvāṃ yoṣaṇā rathamatiṣṭhadvājinīvasū |viśvānyaśvinā yuvaṃ pra dhītānyagacchatam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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