ऋग्वेद 8.8.15
यो वां॑ नासत्या॒वृषि॑र्गी॒र्भिर्व॒त्सो अवी॑वृधत् ।तस्मै॑ स॒हस्र॑निर्णिज॒मिषं॑ धत्तं घृत॒श्चुत॑म्॥
yo vāṃ nāsatyāvṛṣirgīrbhirvatso avīvṛdhat |tasmai sahasranirṇijamiṣaṃ dhattaṃ ghṛtaścutam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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