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ऋग्वेद 8.81.2
वि॒द्मा हि त्वा॑ तुविकू॒र्मिं तु॒विदे॑ष्णं तु॒वीम॑घम् ।तु॒वि॒मा॒त्रमवो॑भिः॥
vidmā hi tvā tuvikūrmiṃ tuvideṣṇaṃ tuvīmagham |tuvimātramavobhiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंवि॒द्मा हि त्वा॑ तुविकू॒र्मिं तु॒विदे॑ष्णं तु॒वीम॑घम् ।तु॒वि॒मा॒त्रमवो॑भिः॥
vidmā hi tvā tuvikūrmiṃ tuvideṣṇaṃ tuvīmagham |tuvimātramavobhiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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