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ऋग्वेद 8.81.3
न॒हि त्वा॑ शूर दे॒वा न मर्ता॑सो॒ दित्स॑न्तम् ।भी॒मं न गां वा॒रय॑न्ते॥
nahi tvā śūra devā na martāso ditsantam |bhīmaṃ na gāṃ vārayante ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंन॒हि त्वा॑ शूर दे॒वा न मर्ता॑सो॒ दित्स॑न्तम् ।भी॒मं न गां वा॒रय॑न्ते॥
nahi tvā śūra devā na martāso ditsantam |bhīmaṃ na gāṃ vārayante ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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