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ऋग्वेद 8.81.7
उप॑ क्रम॒स्वा भ॑र धृष॒ता धृ॑ष्णो॒ जना॑नाम् ।अदा॑शूष्टरस्य॒ वेद॑:॥
upa kramasvā bhara dhṛṣatā dhṛṣṇo janānām |adāśūṣṭarasya veda: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंउप॑ क्रम॒स्वा भ॑र धृष॒ता धृ॑ष्णो॒ जना॑नाम् ।अदा॑शूष्टरस्य॒ वेद॑:॥
upa kramasvā bhara dhṛṣatā dhṛṣṇo janānām |adāśūṣṭarasya veda: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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