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ऋग्वेद 8.93.15
आदु॑ मे निव॒रो भु॑वद्वृत्र॒हादि॑ष्ट॒ पौंस्य॑म् ।अजा॑तशत्रु॒रस्तृ॑तः॥
ādu me nivaro bhuvadvṛtrahādiṣṭa pauṃsyam |ajātaśatrurastṛtaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंआदु॑ मे निव॒रो भु॑वद्वृत्र॒हादि॑ष्ट॒ पौंस्य॑म् ।अजा॑तशत्रु॒रस्तृ॑तः॥
ādu me nivaro bhuvadvṛtrahādiṣṭa pauṃsyam |ajātaśatrurastṛtaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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