ऋग्वेद 8.95.9
इन्द्र॑ शु॒द्धो हि नो॑ र॒यिं शु॒द्धो रत्ना॑नि दा॒शुषे॑ ।शु॒द्धो वृ॒त्राणि॑ जिघ्नसे शु॒द्धो वाजं॑ सिषाससि॥
indra śuddho hi no rayiṃ śuddho ratnāni dāśuṣe |śuddho vṛtrāṇi jighnase śuddho vājaṃ siṣāsasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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