ऋग्वेद 9.100.9
त्वं द्यां च॑ महिव्रत पृथि॒वीं चाति॑ जभ्रिषे ।प्रति॑ द्रा॒पिम॑मुञ्चथा॒: पव॑मान महित्व॒ना॥
tvaṃ dyāṃ ca mahivrata pṛthivīṃ cāti jabhriṣe |prati drāpimamuñcathā: pavamāna mahitvanā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें