ऋग्वेद 9.101.10
सोमा॑: पवन्त॒ इन्द॑वो॒ऽस्मभ्यं॑ गातु॒वित्त॑माः ।मि॒त्राः सु॑वा॒ना अ॑रे॒पस॑: स्वा॒ध्य॑: स्व॒र्विद॑:॥
somā: pavanta indavo'smabhyaṃ gātuvittamāḥ |mitrāḥ suvānā arepasa: svādhya: svarvida: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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