ऋग्वेद 9.101.12
ए॒ते पू॒ता वि॑प॒श्चित॒: सोमा॑सो॒ दध्या॑शिरः ।सूर्या॑सो॒ न द॑र्श॒तासो॑ जिग॒त्नवो॑ ध्रु॒वा घृ॒ते॥
ete pūtā vipaścita: somāso dadhyāśiraḥ |sūryāso na darśatāso jigatnavo dhruvā ghṛte ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें