ऋग्वेद 9.101.16
अव्यो॒ वारे॑भिः पवते॒ सोमो॒ गव्ये॒ अधि॑ त्व॒चि ।कनि॑क्रद॒द्वृषा॒ हरि॒रिन्द्र॑स्या॒भ्ये॑ति निष्कृ॒तम्॥
avyo vārebhiḥ pavate somo gavye adhi tvaci |kanikradadvṛṣā haririndrasyābhyeti niṣkṛtam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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