ऋग्वेद 9.106.10
सोम॑: पुना॒न ऊ॒र्मिणाऽव्यो॒ वारं॒ वि धा॑वति ।अग्रे॑ वा॒चः पव॑मान॒: कनि॑क्रदत्॥
soma: punāna ūrmiṇā'vyo vāraṃ vi dhāvati |agre vācaḥ pavamāna: kanikradat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें