ऋग्वेद 9.106.13
पव॑ते हर्य॒तो हरि॒रति॒ ह्वरां॑सि॒ रंह्या॑ ।अ॒भ्यर्ष॑न्त्स्तो॒तृभ्यो॑ वी॒रव॒द्यश॑:॥
pavate haryato harirati hvarāṃsi raṃhyā |abhyarṣantstotṛbhyo vīravadyaśa: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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