ऋग्वेद 9.107.10
आ सो॑म सुवा॒नो अद्रि॑भिस्ति॒रो वारा॑ण्य॒व्यया॑ ।जनो॒ न पु॒रि च॒म्वो॑र्विश॒द्धरि॒: सदो॒ वने॑षु दधिषे॥
ā soma suvāno adribhistiro vārāṇyavyayā |jano na puri camvorviśaddhari: sado vaneṣu dadhiṣe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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