ऋग्वेद 9.107.13
आ ह॑र्य॒तो अर्जु॑ने॒ अत्के॑ अव्यत प्रि॒यः सू॒नुर्न मर्ज्य॑: ।तमीं॑ हिन्वन्त्य॒पसो॒ यथा॒ रथं॑ न॒दीष्वा गभ॑स्त्योः॥
ā haryato arjune atke avyata priyaḥ sūnurna marjya: |tamīṃ hinvantyapaso yathā rathaṃ nadīṣvā gabhastyoḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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