ऋग्वेद 9.107.17
इन्द्रा॑य पवते॒ मद॒: सोमो॑ म॒रुत्व॑ते सु॒तः ।स॒हस्र॑धारो॒ अत्यव्य॑मर्षति॒ तमी॑ मृजन्त्या॒यव॑:॥
indrāya pavate mada: somo marutvate sutaḥ |sahasradhāro atyavyamarṣati tamī mṛjantyāyava: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें