ऋग्वेद 9.107.19
तवा॒हं सो॑म रारण स॒ख्य इ॑न्दो दि॒वेदि॑वे ।पु॒रूणि॑ बभ्रो॒ नि च॑रन्ति॒ मामव॑ परि॒धीँरति॒ ताँ इ॑हि॥
tavāhaṃ soma rāraṇa sakhya indo divedive |purūṇi babhro ni caranti māmava paridhīm̐rati tām̐ ihi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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