ऋग्वेद 9.107.20
उ॒ताहं नक्त॑मु॒त सो॑म ते॒ दिवा॑ स॒ख्याय॑ बभ्र॒ ऊध॑नि ।घृ॒णा तप॑न्त॒मति॒ सूर्यं॑ प॒रः श॑कु॒ना इ॑व पप्तिम॥
utāhaṃ naktamuta soma te divā sakhyāya babhra ūdhani |ghṛṇā tapantamati sūryaṃ paraḥ śakunā iva paptima ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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