ऋग्वेद 9.107.23
पव॑स्व॒ वाज॑सातये॒ऽभि विश्वा॑नि॒ काव्या॑ ।त्वं स॑मु॒द्रं प्र॑थ॒मो वि धा॑रयो दे॒वेभ्य॑: सोम मत्स॒रः॥
pavasva vājasātaye'bhi viśvāni kāvyā |tvaṃ samudraṃ prathamo vi dhārayo devebhya: soma matsaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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