ऋग्वेद 9.107.24
स तू प॑वस्व॒ परि॒ पार्थि॑वं॒ रजो॑ दि॒व्या च॑ सोम॒ धर्म॑भिः ।त्वां विप्रा॑सो म॒तिभि॑र्विचक्षण शु॒भ्रं हि॑न्वन्ति धी॒तिभि॑:॥
sa tū pavasva pari pārthivaṃ rajo divyā ca soma dharmabhiḥ |tvāṃ viprāso matibhirvicakṣaṇa śubhraṃ hinvanti dhītibhi: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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