ऋग्वेद 9.108.14
यस्य॑ न॒ इन्द्र॒: पिबा॒द्यस्य॑ म॒रुतो॒ यस्य॑ वार्य॒मणा॒ भग॑: ।आ येन॑ मि॒त्रावरु॑णा॒ करा॑मह॒ एन्द्र॒मव॑से म॒हे॥
yasya na indra: pibādyasya maruto yasya vāryamaṇā bhaga: |ā yena mitrāvaruṇā karāmaha endramavase mahe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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