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ऋग्वेद 9.16.6
पु॒ना॒नो रू॒पे अ॒व्यये॒ विश्वा॒ अर्ष॑न्न॒भि श्रिय॑: ।शूरो॒ न गोषु॑ तिष्ठति॥
punāno rūpe avyaye viśvā arṣannabhi śriya: |śūro na goṣu tiṣṭhati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंपु॒ना॒नो रू॒पे अ॒व्यये॒ विश्वा॒ अर्ष॑न्न॒भि श्रिय॑: ।शूरो॒ न गोषु॑ तिष्ठति॥
punāno rūpe avyaye viśvā arṣannabhi śriya: |śūro na goṣu tiṣṭhati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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