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ऋग्वेद 9.29.4
विश्वा॒ वसू॑नि सं॒जय॒न्पव॑स्व सोम॒ धार॑या ।इ॒नु द्वेषां॑सि स॒ध्र्य॑क्॥
viśvā vasūni saṃjayanpavasva soma dhārayā |inu dveṣāṃsi sadhryak ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंविश्वा॒ वसू॑नि सं॒जय॒न्पव॑स्व सोम॒ धार॑या ।इ॒नु द्वेषां॑सि स॒ध्र्य॑क्॥
viśvā vasūni saṃjayanpavasva soma dhārayā |inu dveṣāṃsi sadhryak ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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