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ऋग्वेद 9.62.26
त्वं स॑मु॒द्रिया॑ अ॒पो॑ऽग्रि॒यो वाच॑ ई॒रय॑न् ।पव॑स्व विश्वमेजय॥
tvaṃ samudriyā apo'griyo vāca īrayan |pavasva viśvamejaya ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंत्वं स॑मु॒द्रिया॑ अ॒पो॑ऽग्रि॒यो वाच॑ ई॒रय॑न् ।पव॑स्व विश्वमेजय॥
tvaṃ samudriyā apo'griyo vāca īrayan |pavasva viśvamejaya ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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