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ऋग्वेद 9.62.8
सो अ॒र्षेन्द्रा॑य पी॒तये॑ ति॒रो रोमा॑ण्य॒व्यया॑ ।सीद॒न्योना॒ वने॒ष्वा॥
so arṣendrāya pītaye tiro romāṇyavyayā |sīdanyonā vaneṣvā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंसो अ॒र्षेन्द्रा॑य पी॒तये॑ ति॒रो रोमा॑ण्य॒व्यया॑ ।सीद॒न्योना॒ वने॒ष्वा॥
so arṣendrāya pītaye tiro romāṇyavyayā |sīdanyonā vaneṣvā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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