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ऋग्वेद 9.64.24
रसं॑ ते मि॒त्रो अ॑र्य॒मा पिब॑न्ति॒ वरु॑णः कवे ।पव॑मानस्य म॒रुत॑:॥
rasaṃ te mitro aryamā pibanti varuṇaḥ kave |pavamānasya maruta: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंरसं॑ ते मि॒त्रो अ॑र्य॒मा पिब॑न्ति॒ वरु॑णः कवे ।पव॑मानस्य म॒रुत॑:॥
rasaṃ te mitro aryamā pibanti varuṇaḥ kave |pavamānasya maruta: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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