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ऋग्वेद 9.64.25
त्वं सो॑म विप॒श्चितं॑ पुना॒नो वाच॑मिष्यसि ।इन्दो॑ स॒हस्र॑भर्णसम्॥
tvaṃ soma vipaścitaṃ punāno vācamiṣyasi |indo sahasrabharṇasam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंत्वं सो॑म विप॒श्चितं॑ पुना॒नो वाच॑मिष्यसि ।इन्दो॑ स॒हस्र॑भर्णसम्॥
tvaṃ soma vipaścitaṃ punāno vācamiṣyasi |indo sahasrabharṇasam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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