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ऋग्वेद 9.65.15
यस्य॑ ते॒ मद्यं॒ रसं॑ ती॒व्रं दु॒हन्त्यद्रि॑भिः ।स प॑वस्वाभिमाति॒हा॥
yasya te madyaṃ rasaṃ tīvraṃ duhantyadribhiḥ |sa pavasvābhimātihā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंयस्य॑ ते॒ मद्यं॒ रसं॑ ती॒व्रं दु॒हन्त्यद्रि॑भिः ।स प॑वस्वाभिमाति॒हा॥
yasya te madyaṃ rasaṃ tīvraṃ duhantyadribhiḥ |sa pavasvābhimātihā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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