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ऋग्वेद 9.65.20
अ॒प्सा इन्द्रा॑य वा॒यवे॒ वरु॑णाय म॒रुद्भ्य॑: ।सोमो॑ अर्षति॒ विष्ण॑वे॥
apsā indrāya vāyave varuṇāya marudbhya: |somo arṣati viṣṇave ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंअ॒प्सा इन्द्रा॑य वा॒यवे॒ वरु॑णाय म॒रुद्भ्य॑: ।सोमो॑ अर्षति॒ विष्ण॑वे॥
apsā indrāya vāyave varuṇāya marudbhya: |somo arṣati viṣṇave ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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