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ऋग्वेद 9.65.24
ते नो॑ वृ॒ष्टिं दि॒वस्परि॒ पव॑न्ता॒मा सु॒वीर्य॑म् ।सु॒वा॒ना दे॒वास॒ इन्द॑वः॥
te no vṛṣṭiṃ divaspari pavantāmā suvīryam |suvānā devāsa indavaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंते नो॑ वृ॒ष्टिं दि॒वस्परि॒ पव॑न्ता॒मा सु॒वीर्य॑म् ।सु॒वा॒ना दे॒वास॒ इन्द॑वः॥
te no vṛṣṭiṃ divaspari pavantāmā suvīryam |suvānā devāsa indavaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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