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ऋग्वेद 9.66.21
अग्ने॒ पव॑स्व॒ स्वपा॑ अ॒स्मे वर्च॑: सु॒वीर्य॑म् ।दध॑द्र॒यिं मयि॒ पोष॑म्॥
agne pavasva svapā asme varca: suvīryam |dadhadrayiṃ mayi poṣam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंअग्ने॒ पव॑स्व॒ स्वपा॑ अ॒स्मे वर्च॑: सु॒वीर्य॑म् ।दध॑द्र॒यिं मयि॒ पोष॑म्॥
agne pavasva svapā asme varca: suvīryam |dadhadrayiṃ mayi poṣam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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