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ऋग्वेद 9.67.15
परि॒ प्र सो॑म ते॒ रसोऽस॑र्जि क॒लशे॑ सु॒तः ।श्ये॒नो न त॒क्तो अ॑र्षति॥
pari pra soma te raso'sarji kalaśe sutaḥ |śyeno na takto arṣati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंपरि॒ प्र सो॑म ते॒ रसोऽस॑र्जि क॒लशे॑ सु॒तः ।श्ये॒नो न त॒क्तो अ॑र्षति॥
pari pra soma te raso'sarji kalaśe sutaḥ |śyeno na takto arṣati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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