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ऋग्वेद 9.97.21
ए॒वा न॑ इन्दो अ॒भि दे॒ववी॑तिं॒ परि॑ स्रव॒ नभो॒ अर्ण॑श्च॒मूषु॑ ।सोमो॑ अ॒स्मभ्यं॒ काम्यं॑ बृ॒हन्तं॑ र॒यिं द॑दातु वी॒रव॑न्तमु॒ग्रम्॥
evā na indo abhi devavītiṃ pari srava nabho arṇaścamūṣu |somo asmabhyaṃ kāmyaṃ bṛhantaṃ rayiṃ dadātu vīravantamugram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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