वाल्मीकि रामायण 1.16.14
दिवाकर समाअकारम् दीप्त अनल शिखोपमम् ।तप्त जाम्बूनदमयीम् राजतान्त परिच्छदाम्॥
divākara samāakāram dīpta anala śikhopamam |tapta jāmbūnadamayīm rājatānta paricchadām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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