वाल्मीकि रामायण 1.16.2
उपायः को वधे तस्य राक्ष्साधिपतेः सुराः ।यम् अहम् तम् समास्थाय निहन्याम् ऋषि कण्टकम्॥
upāyaḥ ko vadhe tasya rākṣsādhipateḥ surāḥ |yam aham tam samāsthāya nihanyām ṛṣi kaṇṭakam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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