वाल्मीकि रामायण 1.3.3
राम लक्ष्मण सीताभिः राज्ञा दशरथेन च ।स भार्येण स राष्ट्रेण यत् प्राप्तम् तत्र तत्त्वतः॥
rāma lakṣmaṇa sītābhiḥ rājñā daśarathena ca |sa bhāryeṇa sa rāṣṭreṇa yat prāptam tatra tattvataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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