वाल्मीकि रामायण 1.34.4
एवम् उक्त्वा कुशो राम कुशनाभम् महीपतिम् ।जगाम आकाशम् आविश्य ब्रह्म लोकम् सनातनम्॥
evam uktvā kuśo rāma kuśanābham mahīpatim |jagāma ākāśam āviśya brahma lokam sanātanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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