वाल्मीकि रामायण 1.58.3
फल मूल अशनो दान्तैः चचार महत् तपः ।अथ अस्य जज्ञिरे पुत्राः सत्य धर्म परायणाः॥
phala mūla aśano dāntaiḥ cacāra mahat tapaḥ |atha asya jajñire putrāḥ satya dharma parāyaṇāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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