वाल्मीकि रामायण 1.60.31
गगने तानि अनेकानि वैश्वानर पथात् बहिः ।नक्षत्राणि मुनि श्रेष्ठ तेषु ज्योतिःषु जाज्वलन्॥
gagane tāni anekāni vaiśvānara pathāt bahiḥ |nakṣatrāṇi muni śreṣṭha teṣu jyotiḥṣu jājvalan ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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